आज होश में आने को मत कहो,
जाम से नहीं आँखों से जो पी है ।
आज न जगाओ मुझे नींद से ,
साकी के आगोश में जो ली है ।
लबों से मुस्कुराहट हटती नहीं ,
तुम्हारे लबों पर हँसी जो देख ली है ।
आशिक़ी की राह में अब डर नहीं ,
तुमने जो मेरी बाँह थाम ली है ।
आज कोई छुए न मुझे ,
तेरे बदन का एहसास जो बाकी है ।
आज कुछ सुनना न चाहूँ मैं,
तेरी बातों की कशिश जो बाकी है ।
जाड़ों की सर्द हवाओं में भी ,
तेरी सांसों की तपिश जो बाकी है ।
आज होश में आने को मत कहो ,
तेरी आँखों के जाम अभी बाकी है ।
Wah wah!
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