दिल के हाथों मजबूर, आज फिर आया हूँ ।
भुलाना चाहा तुमको, पर भुला न पाया हूँ ॥
बस जाओ इन आँखों में, पलकों में सजा लूंगा ।
अब जो थामा हाथ तेरा, हाथ न छुड़ाऊंगा ॥
कहाँ कहाँ ढूंढा तुझे, पर मिली न तू कहीं ।
दिन रात दुआएँ की, पर लौट के आ गईं ॥
एक बार तू मिल जाये, हर सांस में समाऊंगा॥
अब जो थामा हाथ तेरा, हाथ न छुड़ाऊंगा ॥
दिल के हाथों मजबूर, आज फिर आया हूँ ।
भुलाना चाहा तुमको, पर भुला न पाया हूँ ॥
बस जाओ इन आँखों में, पलकों में सजा लूंगा ।
अब जो थामा हाथ तेरा, हाथ न छुड़ाऊंगा ॥
फूलों की खुशबू तुम, हम दिया और बाती हैं ।
कितना भुलाया तुझे, पर याद से न जाती हैं ॥
कितना सुकून तेरी बातों में, मिल कर बताऊंगा॥
अब जो थामा हाथ तेरा, हाथ न छुड़ाऊंगा ॥
बदिल के हाथों मजबूर, आज फिर आया हूँ ।
भुलाना चाहा तुमको, पर भुला न पाया हूँ ॥
बस जाओ इन आँखों में, पलकों में सजा लूंगा ।
अब जो थामा हाथ तेरा, हाथ न छुड़ाऊंगा ॥
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