बादल का गर्जना और दिल का यूं धड़कना,
वो लड़कपन की बातें याद आती हैं ।
वो रिम झिम बरसातें याद आती हैं ...............
चेहरे पर तुम्हारी बूंदों का यूं गिरना ।
और फिर उँगलियों से उन्हें यूं हटाना ॥
हथेलियों में भर पानी, नज़रों का यूं मिलाना।
और हथेलियां बंद कर, नज़रों का यूं चुराना ॥
वों प्यार भरी नज़रें याद आती हैं।
वो रिम झिम बरसातें याद आती हैं ॥
वो लड़कपन की बातें याद आती हैं ।
वो रिम झिम बरसातें याद आती हैं.................
पाँव से पाँव मिला कर, पानी में यूं चलना ।
और शरारत भरे मन का, फिर से यूं मचलना ॥
समय का बदलना और तुम्हारा दूर जाना ।
बीती बातों का दिल पर यूं दस्तक आना ॥
वों भीगी शामें याद आती हैं ।
वो रिम झिम बरसातें याद आती हैं ॥
वो लड़कपन की बातें याद आती हैं ।
वो रिम झिम बरसातें याद आती हैं ...............
Nice
ReplyDelete