तुम और मैं, मैं और तुम.............
आधे आधे से हम...................
महज़ब से परे, ख़्वाबों में जुड़ें........
आशियाना बुन रहे...................
जहाँ धरती आस्मां मिलें.............
एक सफर के दो राहीं हम............
एक धागे के दो किनारे................
उलझनों में उलझे ………............
कितने अलग फिर भी एक हैं हम.....
थामे हाथ चल रहे.....................
जहाँ धरती आस्मां मिलें...............
मोहब्बत करना सीखा तुम ही से……
गम में भी मुस्कुराना सीखा तुम ही से....
तुम संग जीना तुम संग मरना……….
ये अंदाज़ भी सीखा तुम ही से............
हर पल में खुशियां ढूँढ रहे................
जहाँ धरती आस्मां मिलें..................
तुम और मैं, मैं और तुम..................
आधे आधे से हम.........................
महज़ब से परे, ख़्वाबों में जुड़ें..............
आशियाना बुन रहे.........................
जहाँ धरती आस्मां मिलें....................
very well written
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